सरदारशहर | भारत खबर
सरदारशहर का करीब 50 साल पुराना राजकीय उपजिला अस्पताल धीरे-धीरे जर्जर हालत में पहुंच चुका था। दीवारों में दरारें, छत से पानी टपकना और सीलन की बदबू मरीजों और स्टाफ दोनों की परेशानी बन गई थी। सरकार और विभाग की ओर से कोई मदद न मिलने पर अब 10 प्रवासी भामाशाह आगे आए हैं, जिन्होंने लगभग 30 लाख रुपए का खर्च उठाकर अस्पताल का कायाकल्प शुरू कर दिया है।
पुराना अस्पताल खस्ताहाल, नया भवन अभी सपना
जानकारी के अनुसार, नए अस्पताल भवन के लिए करीब 51 करोड़ रुपए का बजट मंजूर हो चुका है, लेकिन काम अभी शुरू नहीं हुआ है। इस बीच, पुराना भवन कई जगह से टूट-फूट चुका है। बारिश में लेबर रूम, प्रसूति गृह और नवजात शिशु वार्ड में पानी टपकने की खबरें मीडिया में लगातार आती रही हैं।
कौन-कौन से काम होंगे मरम्मत में?
भामाशाह प्रेरक और पार्षद दीपक बैद के मुताबिक, इन 30 लाख से अस्पताल में कई जरूरी काम कराए जा रहे हैं —
- लेबर वार्ड का सौंदर्याकरण, मरम्मत और शौचालय निर्माण – ₹3 लाख
- ओटी गैलरी की मरम्मत, पेंट और जाली फिटिंग – ₹1 लाख
- ईसीजी रूम का सौंदर्याकरण – ₹50 हजार
- डीडीसी नंबर 1, 2 और 5 का पुनर्निर्माण – ₹4 लाख
- पर्ची काउंटर के सामने टीनशेड – ₹70 हजार
- एमओटी के लिए नया रूम, खिड़की और गेट – ₹2 लाख
- सभी भर्ती वार्ड और डॉक्टर चैंबर की मरम्मत व पेंटिंग
- चिरंजीवी रूम, नसबंदी रूम, ऑफिस और मुख्य द्वार का पुनर्निर्माण
इसके साथ ही पूरे अस्पताल परिसर का रंग-रोगन और सीलन हटाने का काम भी हो रहा है।
सिर्फ मरम्मत ही नहीं, नए उपकरण भी मिले
भामाशाहों ने अस्पताल को ज़रूरी मशीनें और उपकरण भी दिए हैं —
- 5 ऑक्सीजन सिलेंडर – ₹55 हजार
- यूरीन टेस्ट मशीन – ₹35 हजार
- लैब और पर्ची काउंटर के लिए प्रिंटर – ₹60 हजार
- टीकाकरण रूम के लिए एसी – ₹40 हजार
- एमओटी के लिए आलमारी और अन्य संसाधन
अस्पताल प्रभारी ने की सराहना
अस्पताल प्रभारी डॉ. चंद्रभान जांगिड़ ने कहा,
“पुराने भवन की स्थिति खराब है, नए अस्पताल के लिए बजट पास हो चुका है, जल्द काम शुरू होगा। लेकिन इस बीच भामाशाहों का सहयोग काबिले-तारीफ है।”


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