चूरू राजस्थान में मूंगफली की रिकॉर्ड बुवाई, 91,300 हैक्टेयर में खेती, किसान नरमा से मूंगफली की ओर रुख करते हुए

चूरू का रिकॉर्ड! मूंगफली की बुवाई ने तोड़ा पिछले साल का हर रिकॉर्ड, जानिए क्यों हो रही इतनी खेती

चूरू ज़िले के किसानों ने इस बार मूंगफली की खेती में ऐसा इतिहास रच दिया है, जो पहले कभी नहीं हुआ। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजकुमार कुल्हरी के अनुसार, ज़िले में मूंगफली की बुवाई का लक्ष्य 90 हजार हैक्टेयर तय किया गया था, लेकिन किसानों के बढ़ते उत्साह ने इसे पार कर दिया। नतीजा—कुल 91,300 हैक्टेयर में बुवाई हुई।

तुलना करें तो, 2024 में यह आंकड़ा 85 हजार हैक्टेयर और 2023 में 78 हजार हैक्टेयर था। यानी लगातार तीसरे साल मूंगफली की खेती का ग्राफ ऊपर चढ़ रहा है।

सबसे ज्यादा खेती कहां हुई?

  • सरदारशहर इलाके ने सबसे आगे रहते हुए सबसे ज्यादा बुवाई की।
  • तारानगर के किसान भी अब मूंगफली की तरफ तेज़ी से रुख कर रहे हैं।
  • सुजानगढ़, बीदासर तहसीलों में भी फसल की हालत शानदार है।
  • सादुलपुर में यह खेती अपेक्षाकृत कम होती है।

फिलहाल खेतों में मूंगफली की हरी-भरी फसल लहरा रही है और किसानों के चेहरों पर पैदावार को लेकर खुशी साफ झलक रही है।

एक्सपर्ट की माने तो – मूंगफली क्यों बढ़ी?


कृषि विभाग के सहायक निदेशक डॉ. कुलदीप शर्मा के मुताबिक, इस बार किसान कॉटन (नरमा) की बजाय मूंगफली की तरफ ज्यादा झुके हैं। वजहें साफ हैं:
  • नरमा में गुलाबी सुंडी का खतरा ज्यादा है।
  • नरमा का बाजार भाव कम चल रहा है।

इसी कारण, जो ज़मीन पहले नरमा के लिए इस्तेमाल होती थी, वह अब मूंगफली के खेतों में बदल गई।

पैदावार और खासियत

  • मूंगफली की प्रति बीघा पैदावार: 7 से 12 क्विंटल
  • चूरू की बालू मिट्टी में पैदा होने वाली मूंगफली सफेद रंग की होती है।
  • सिकाई और खाने में यह बेहद स्वादिष्ट मानी जाती है।
  • यहां की मूंगफली अन्य इलाकों की तुलना में ज्यादा दाम दिलाती है।
  • बालू मिट्टी में जड़ें ज्यादा फैलने से पैदावार भी बढ़ जाती है।

चूरू की मूंगफली अब सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी पहचान और बाजार दोनों में मजबूती से खड़ी है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार न सिर्फ पैदावार रिकॉर्ड तोड़ेगी, बल्कि भाव भी बेहतरीन मिलेंगे।

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